Bharat Ke Swantantra Andolan स्वतंत्रता आंदोलन से Q&A Now 1

Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य): सरकारी नौकरी पाने के लिए और परीक्षा में पास होने के लिए सबसे जरूरी होता है, अपने सामान्य ज्ञान के स्तर को बढ़ाना। सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा में पूछे गए सभी विषयों में से Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य) एक ऐसा विषय है जो परीक्षा में उम्मीदवार को गिरा भी सकता है और उठा भी सकता है। अगर आप दूसरों से आगे निकलना चाहते हैं तो जरुरी है कि आप Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य) के विषय पर अच्छी पकड़ रखें ।

देश में हर रोज रेलवे, बैंक, पुलिस, आर्मी आदि विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी नौकरियां निकलती रहती हैं। जिसके लिए लाखों लोग आवेदन करते हैं और परीक्षा के लिए तैयारी करते हैं और परीक्षा भी देते हैं। लेकिन कुछ लोग ही ऐसे होतें हैं जो परीक्षा को पास कर लेते हैं और जिनका सरकारी नौकरी के लिए सिलेक्शन हो पाता है। बहुत से लोगों को सरकारी नहींं मिल पाती जिसकी वजह से वो निराश हो जाते हैं। जिन लोगों को सरकारी नौकरी नहीं मिल पाती उसके कई कारण हो सकते हैं। जिनमें से एक कारण यह भी होता है कि उन्होंने या तो मेहनत नहीं कि या फिर उनके ज्ञान में कहीं न कहीं कमी रह गई।

Bharat Ke Swantantra Andolan

Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य): यहां पर सामान्य जीके से संबंधित सभी प्रश्न दिए गए हैं, जो परीक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। इन प्रश्नों से आपको परीक्षा में जरूर मदद मिलेगी।

1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना,-1885 ई.
2. बंग-भंग आंदोलन(स्वदेशी आंदोलन)-1905 ई.
3. मुस्लिम लीग की स्थापना-1906 ई.
4.कांग्रेस का बंटवारा-1907 ई.
5. होमरूल आंदोलन1916 ई.
6. लखनऊ पैक्ट-दिसंबर 1916 ई.
7. मांटेग्यू घोषणा-20 अगस्त 1917 ई.
8. रौलेट एक्ट-19 मार्च 1919 ई.
9. जालियांवाला बाग हत्याकांड-13 अप्रैल 1919 ई.
10. खिलाफत आंदोलन-1919 ई. Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य)
11. हंटर कमिटी की रिपोर्ट प्रकाशित-18 मई 1920 ई.

12. कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन-दिसंबर 1920 ई.
13. असहयोग आंदोलन की शुरुआत-1 अगस्त 1920 ई.
14. चौरी-चौरा कांड-5 फरवरी 1922 ई.
15. स्वराज्य पार्टी की स्थापना-1 जनवरी 1923 ई.
16. हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन-अक्टूबर 1924 ई.
17. साइमन कमीशन की नियुक्ति-8 नवंबर 1927 ई.
18. साइमन कमीशन का भारत आगमन-3 फरवरी 1928 ई.
19. नेहरू रिपोर्ट-अगस्त 1928 ई.
20. बारदौली सत्याग्रह-अक्टूबर 1928 ई. Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य)
21. लाहौर पड्यंत्र केस-8 अप्रैल 1929 ई.
22. कांग्रेस का लाहौर अधिवेशनदिसंबर 1929 ई.

23. स्वाधीनता दिवस की घोषणा-2 जनवरी 1930 ई.
24. नमक सत्याग्रह-12 मार्च 1930 ई. से 5 अप्रैल 1930 ई. तक
25. सविनय अवज्ञा आंदोलन-6 अप्रैल 1930 ई.
26. प्रथम गोलमेज आंदोलन-12 नवंबर 1930 ई.
27. गांधी-इरविन समझौता-8 मार्च 1931 ई.
28.द्वितीय गोलमेज सम्मेलन-7 सितंबर 1931 ई.

29. कम्युनल अवार्ड (साम्प्रदायिक पंचाट)-16 अगस्त 1932 ई.
30.पूना पैक्ट-सितंबर 1932 ई. Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य)
31. तृतीय गोलमेज सम्मेलन-17 नवंबर 1932 ई.
32. कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन-मई 1934 ई.
33. फॉरवर्ड ब्लाक का गठन-1 मई 1939 ई.
34. मुक्ति दिवस-22 दिसंबर 1939 ई.

35. पाकिस्तान की मांग-24 मार्च 1940 ई.
36. अगस्त प्रस्ताव-8 अगस्त 1940 ई.
37. क्रिप्स मिशन का प्रस्ताव-मार्च 1942 ई.
38. भारत छोड़ो प्रस्ताव-8 अगस्त 1942 ई.
39. शिमला सम्मेलन-25 जून 1945 ई. Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य)
40. नौसेना का विद्रोह-19 फरवरी 1946 ई.

41. प्रधानमंत्री एटली की घोषणा-15 मार्च 1946 ई.
42. कैबिनेट मिशन का आगमन-24 मार्च 1942 ई.
43. प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस-16 अगस्त 1946 ई.
44. अंतरिम सरकार की स्थापना-2 सितंबर 1946 ई.
45. माउंटबेटन योजना-3 जून 1947 ई.
46. स्वतंत्रता मिली-15 अगस्त 1947 ई

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं

भारत को आजाद कराने में कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं ने भूमिका निभाई थी. आइये इस लेख के माध्यम से उन घटनाओं के बारे में अध्ययन करते हैं कि कब ये घटनाएं कब और कैसे हुई थी, इसमें किसने मुख्य भूमिका निभाई थी इत्यादि.

भारत को आजाद हुए 72 साल हो चुके हैं. परन्तु क्या आप जानते हैं कि ऐसे कौन से सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं हैं जिनके कारण भारत को आजादी मिली.

इन महत्वपूर्ण घटनाओं से पहले आपको बता दें कि ब्रिटिशभारत में राजनीतिक सत्ता 1757 में पलासी के युद्ध के बाद जीत गए. यही वो समय था जब अंग्रेज भारत आए और करीब 200 साल तक राज किया.

क्या आप जानते हैं कि 1848 में लॉर्ड डलहौज़ी के कार्यकाल के दौरान ही यहां अंग्रेजों का शासन स्थापित हुआ था.

सबसे पहले उत्तर-पश्चिमी भारत अंग्रेजों के निशाने पर रहा और उन्होंने अपना मजबूत अधिकार 1856 तक स्थापित कर लिया था. इसका नतीजा था 1857 का विद्रोह और यह ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ पहला संगठित आंदोलन कहलाया.

1. 1857 का विद्रोह

शुरुआत: 10 मई 1857 Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य)

मुख्य भूमिका: मंगल पांडे, बख़्त खान, बेगम हजरत महल, नाना साहब,रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, इत्यादि.

कारण: लॉर्ड डलहौजी की “राज्य हड़प नीति”, लॉर्ड वेलेजली की “सहायक संधि” और सैनिको को चर्बी युक्त कारतूस का उपयोग करने पर बाध्य करना.

यह विद्रोह, प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, सिपाही विद्रोह और भारतीय विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है. 1857 की क्रान्ति की शुरूआत ’10 मई 1857′ को मेरठ मे हुई थी. 

34th Bengal Native Infantry कंपनी के सैनिक मंगल पांडे ने एक सिपाही विद्रोह के रूप में इस आंदोलन को मेरठ में शुरू किया गया था, जो नई एनफील्ड राइफल में लगने वाले कारतूस के कारण हुआ था. ये कारतूस गाय और सूअर की चर्बी से बने होते थे जिसे सैनिक को राइफल इस्तेमाल करने के लिए मुंह से हटाना होता था और ऐसा करने से सैनिकों ने मना कर दिया था. यह विद्रोह दो वर्षों तक भारत के विभिन्न क्षेत्रों में चला. नाना साहिब, तातिया टोपे और रानी लक्ष्मीबाई इत्यादि इस आंदोलन में शामिल हुए थे.

2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना

स्थापना: 28 दिसम्बर 1885

संस्थापक: Allan Octavian Hume, Dadabhai Naoroji और Dinshaw Wacha

कारण: ब्रिटिश थिंक टैंक की अवधारणा के अनुसार, भारतीय जनता और ब्रिटिश सरकार के बीच, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के नाम से जाना जाने वाला एक बफर संगठन होगा.

Allan Octavian Hume, Dadabhai Naoroji और Theosophical Society के सदस्य Dinshaw Wacha ने मार्च 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन किया था. Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य)

हम आपको बता दें कि यह एशिया और अफ्रीका में ब्रिटिश साम्राज्य में उभरने वाला पहला आधुनिक राष्ट्रवादी आंदोलन था.

पार्टी ने ब्रिटिश साम्राज्य के साथ शर्तों को रखना और बातचीत करना शुरू किया और तब से आंदोलनों को व्यवस्थित किया.

यह आंदोलन केवल 72 प्रतिनिधियों के साथ शुरू हुआ था. 1947 में स्वतंत्रता आंदोलन के अंत तक कांग्रेस 15 मिलियन से अधिक सदस्यों के साथ एक मजबूत पार्टी के रूप में उभरी थी.

3. बंगाल का विभाजन

घोषणा: 19 जुलाई 1905

किसने की: वायसराय लॉर्ड कर्जन

कारण: मुस्लिम और हिंदू यहाँ भाइयों की तरह रहते थे. उनकी एकता ब्रिटिशों के लिए मुख्य खतरा थी. दूसरा प्रशासनिक कारण था.

बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा 19 जुलाई 1905 को भारत के तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड कर्ज़न द्वारा की गयी थी.

विभाजन 16 अक्टूबर 1905 से प्रभावी हुआ था. विभाजन के कारण उत्पन्न उच्च स्तरीय राजनीतिक अशांति के कारण 1911 में दोनो तरफ की भारतीय जनता के दबाव की वजह से बंगाल के पूर्वी एवं पश्चिमी हिस्से पुनः एक हो गए थे.

4. महात्मा गांधी का आगमन

गांधी जी भारत कब आए: 1915 Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य)

कारण: गोपाल कृष्ण गोखले के अनुरोध पर गांधी जी भारत लौटे.

दक्षिण अफ्रीका में औपनिवेशिक साम्राज्य के खिलाफ लड़ने के बाद, गांधी जी 1915 में भारत आए थे.

उन्होंने भूमि कर जैसे दमनकारी औपनिवेशिक कानूनों के विरोध में किसानों और मजदूरों का आयोजन करना शुरू किया.

गांधी जी 1921 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे और ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलनों (nationwide movements)का नेतृत्व किया.

इसमें कोई संदेह नहीं हैं कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका सर्वोपरि रही है.

उन्होंने अहिंसा, महिलाओं के अधिकारों का प्रचार किया, अस्पृश्यता और विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच कमजोर नीतियों के खिलाफ विरोध किया था.

5. जलियांवाला बाग कांड

कब हुआ: 13 अप्रैल 1919 Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य)

किसके कहने पर: ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर

कारण: ब्रिटिश सरकार द्वारा दो राष्ट्रवादी नेताओं, डॉ सैफुद्दीन किचलू और डॉ सत्यपाल की गिरफ्तारी.

13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने निहत्थे, बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों पर गोलियां चला दी और मार डाला. हज़ारों लोगों घायल हो गए थे. यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यह जघन्य हत्याकांड ही था.

इसने भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के स्वर को बदल दिया, भगत सिंह जैसे विद्रोहियों को जन्म दिया. रवींद्रनाथ टैगोर ने इस नरसंहार के खिलाफ विरोध किया और knighthood की उपाधि को लौटा दिया.

6. खिलाफत आंदोलन

शुरुआत: 1919 Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य)

मुख्य भूमिका: शौकत अली, मुहम्मद अली और अबुल कलाम आजाद

कारण: ब्रिटिश सरकार पर तुर्की के खालिफा के अधिकार को संरक्षित करने के लिए दबाव डालना था.

खिलाफत आन्दोलन भारत में मुख्यत: मुसलमानों द्वारा चलाया गया राजनीतिक-धार्मिक आन्दोलन था. इस आन्दोलन का उद्देश्य (सुन्नी) इस्लाम के मुखिया माने जाने वाले तुर्की के खलीफा के पद की पुन:स्थापना कराने के लिये अंग्रेजों पर दबाव बनाना था.

सन् 1924 में मुस्तफ़ा कमाल के खलीफ़ा पद को समाप्त किये जाने के बाद यह अपने-आप समाप्त हो गया था.

इस आंदोलन को एक राजनीतिक स्तर तब प्राप्त हुआ जब मुसलमानों ने कांग्रेस के साथ उपनिवेशवादियों के खिलाफ हाथ मिला लिए थे.

7. दिल्ली विधानसभा बम विस्फोट

कब हुआ: 1929

मुख्य भूमिका: भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त

कारण: कानूनी मुकदमे के माध्यम से ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अपने तर्क प्रस्तुत करना.

1929 में, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली केंद्रीय विधानसभा में राजनीतिक कारणों से धुएं वाले बमों को फेंका.

उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि उनको गिरफ्तार किया जाए ताकि वे कानूनी मुकदमे के माध्यम से ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अपने तर्क प्रस्तुत कर पाए.

8. असहयोग आंदोलन / नमक कानून

शुरुआत: 1 अगस्त 1920

मुख्य भूमिका: महात्मा गाँधी Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य)

कारण: सरकार के साथ सहयोग न करके कार्यवाही में बाधा उपस्थित करना था.

इस आंदोलन के दो चरण थे: 1921-1924  और 1930-1931

ब्रिटिश सरकार द्वारा निष्पक्ष व्यवहार ना होता देख 1920 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरु किया. यह आंदोलन 1922 तक चला और सफल रहा. नमक आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी ने मार्च 1930 में अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से 388 km समुद्र के किनारे बसे शहर दांडी तक की थी. अंग्रेजों के एकछत्र अधिकार वाला कानून तोड़ा और नमक बनाया था.

रावी अधिवेशन, 1929 के लाहौर में रावी नदी के तट पर हुए कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार ‘पूर्ण स्वराज’ की मांग की गई थी.

9. चौरी चौरा कांड

शुरुआत:  फरवरी 1922

मुख्य भूमिका: सत्याग्रहियों द्वारा

ऐतिहासिक महत्व: घटना के कारण ‘असहयोग आंदोलन’ को बंद कर दिया गया था.

चौरी चौरा घटना, 1922 को ब्रिटिश भारत के गोरखपुर जिले में हुई थी और इसको पूर्व स्वतंत्र भारत की सबसे प्रमुख घटनाओं में से एक माना जाता है.

इसी दिन चौरी चौरा थाने के दारोगा गुप्तेश्वर सिंह ने आजादी की लड़ाई लड़ रहे वालंटियरों की खुलेआम पिटाई शुरू कर दी. इसके बाद सत्याग्रहियों की भीड़ पुलिसवालों पर पथराव करने लगी.

जवाबी कार्यवाही में पुलिस ने गोलियां चलाई. जिसमें लगभग 260 व्यक्तियों की मौत हो गई. पुलिस की गोलियां तब रुकीं जब उनके सभी कारतूस समाप्त हो गए. इसके बाद सत्याग्रहियों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होनें थाने में बंद 23 पुलिसवालों को जिंदा जला दिया.

इस घटना के बाद महात्मा गाँधी ने ‘असहयोग आंदोलन’ वापिस ले लिया था.

10. आजाद हिंद फौज/ इंडियन नेशनल आर्मी का गठन

स्थापना: 1942

मुख्य भूमिका: नेताजी सुभाषचंद्र बोस Bharat Ke Swantantra Andolan Important Point (स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित तथ्य)

कारण: ब्रिटिश शासन से भारतीय स्वतंत्रता को सुरक्षित करना.

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942 में भारतीय राष्ट्रवादियों द्वारा राष्ट्रीय सेना या आजाद हिंद फौज का गठन किया गया था.

नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नेतृत्व में, इसका लक्ष्य ब्रिटिश शासन से भारतीय स्वतंत्रता को सुरक्षित करना था, लेकिन समर्थन और अन्न की कमी के कारण आंदोलन फीका पड़ गया था.

साथ ही 1940 में द्वितीय विश्व युद्ध में इंग्लैंड की भागीदारी ने ब्रिटिश साम्राज्य को कमजोर कर दिया था.

11. भारत छोड़ो आंदोलन

शुरुआत: 8 अगस्त 1942

मुख्य भूमिका: महात्मा गाँधी

कारण: भारत को जल्द ही आज़ादी दिलाने के लिए महात्मा गाँधी द्वारा शुरू किया गया था.

8 अगस्त 1942 में गांधीजी ने भारत छोड़ो आंदोलनको शुरु किया. इसका लक्ष्य ब्रिटिश शासन से पूरी तरह आज़ादी हासिल करना था और करो या मरो का नारा दिया. यह आंदोलन ‘अगस्त क्रान्ति’ के नाम से भी जाना जाता है.

भारत को अगस्त 1947 में शासकों, क्रांतिकारियों और उस समय के नागरिकों की कड़ी मेहनत, त्याग और निस्वार्थता के बाद स्वतंत्रता हासिल हुई.

तो ये थीं वो घटनाएं जिन्होंने भारत को स्वतंत्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

  • 28 दिसंबर 1885 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) का गठन गोकुलदास तेजपाल संस्कृत स्कूल, बॉम्बे में किया गया। इसकी अध्यक्षता डब्ल्यू.सी. बैनर्जी ने की थी और इसमें 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। ए.ओ. ह्यूम ने आईएनसी के गठन में अहम भूमिका निभाई थी और इनका उद्देश्य था ब्रिटिश सरकार को सेफ्टी वॉल्व प्रदान करना। 
  • ए.ओ. ह्यूम ने आईएनसी के पहले महासचिव के तौर पर काम किया।
  • कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य भारतीय युवाओं को राजनीतिक आंदोलन में प्रशिक्षित करना और देश में जनता की राय बनाना था। इसके लिए इन्होंने वार्षिक सत्र पद्धति को अपनाया जहां वे समस्याओं पर चर्चा करते थे और संकल्प पारित करते थे।
  • भारतीय राष्ट्रवाद का पहला या आरंभिक चरण मध्यम दर्जे (नरमदल) का चरण (1885-1905) भी कहलाता है। नरमदल के नेता थे, डब्ल्यू.सी. बनर्जी, गोपाल कृष्ण गोखले, आर.सी. दत्ता, फीरोजशाह मेहता, जॉर्ज यूल आदि
  • नरमपंथी नेताओं को ब्रिटिश सरकार में पूर्ण विश्वास था और उन्होंने पीपीपी मार्ग यानि विरोध, प्रार्थना और याचिका, को अपनाया था। 
  • काम के नरमपंथी तरीकों से मोहभंग होने के कारण, 1892 के बाद कांग्रेस में चरमपंथ विकसित होने लगा। चरमपंथी नेता थे– लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिनचंद्र पाल और अरबिंदो घोष। पीपीपी मार्ग के बजाए इन्होंने आत्म– निर्भरता, रचनात्मक कार्य और स्वदेशी पर जोर दिया।
  • प्रशासनिक सुविधा के लिए लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन (1905) की घोषणा के बाद, 1905 में स्वदेशी और बहिष्कार संकल्प पारित किया गया था।

स्वदेशी आंदोलन के दौरान कांग्रेस के सत्रः

  1. 1905 – बनारस में कांग्रेस सत्र। गोपाल कृष्ण गोखले ने अध्यक्षता की।
  2. 1906– कलकत्ता में कांग्रेस सत्र। दादाभाई नैरोजी ने अध्यक्षता की।
  3. 1907– ताप्ती नदी के किनारे सूरत में कांग्रेस का सत्र। फिरोजशाह मेहता ने अध्यक्षता की जिसमें नरमपंथी और चरमपंथियों के बीच मतभेदों की वजह से कांग्रेस में विभाजन हो गया।
  • आगा खान III और मोहसिन मुल्क द्वारा 1906 में मुस्लिम लीग का गठन किया गया।
  • 1909 के मॉर्ले– मिंटो सुधार अधिनियम द्वारा अलग निर्वाचन मंडल प्रस्तुत किया गया था।
  • लाला हरदयाल ने 1913 में गदर आंदोलन शुरु किया था और कोटलैंड में 1 नवंबर 1913 को गदर पार्टी की स्थापना की थी। इसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को के युगांतर आश्रम में था और गदर पत्रिका का प्रकाशन शुरु किया गया था।
  • कोमागाटा मारू घटना सितंबर 1914 में हुई थी और इसके लिए भारतीयों ने शोर कमिटि नाम से एक समिति बनाई थी जो यात्रियों की कानूनी लड़ाई लड़ती थी।
  • 1914 में पहला विश्व युद्ध आरंभ हुआ था।
  • अप्रैल 1916 में तिलक ने होम रूल आंदोलन की शुरुआत की थी। इसका मुख्यालय पूना में था और इसमें स्वराज की मांग की गई थी।
  • सितंबर 1916 में एनीबेसेंट ने होम रूल आंदोलन शुरु किया और इसका मुख्यालय मद्रास के करीब अडियार में था।
  • वर्ष 1916 में हुए कांग्रेस के लखनउ अधिवेशन की अध्यक्षता अम्बिका चरण मौजूमदार (नरमपंथी नेता) ने की थी जहां चरमपंथी और नरमपंथी दोनों प्रकार के नेता एक जुट हुए थे।
  • भारत सरकार अधिनियम 1919 या मोंटागू– चेम्सफोर्ड रिफॉर्म एक्ट को भारत में जिम्मेदार सरकार की स्थापना के लिए पारित किया गया था।
  • 9 जनवरी 1915 को गांधी जी 46 वर्ष की उम्र में दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आए थे।
  • 1916 में गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के विचार के प्रचार के लिए अहमदाबाद (गुजरात) में साबरमती आश्रम की स्थापना की।
  • चंपारण सत्याग्रह– 1917
  • खेड़ा सत्याग्रह– 1917
  • अहमदाबाद मिल हड़ताल– 1918
  • रॉलेक्ट एक्ट सत्याग्रह– फरवरी, 1919
  • गांधी जी ने फरवरी, 1919 में सत्याग्रह सभा की स्थापना की। इस आंदोलन में छात्र, मध्यम वर्ग, मजदूर और पूंजीपतियों ने हिस्सा लिया और संगठन के तौर पर कांग्रेस कहीं नहीं थी। यह गांधी जी का पहला जन आंदोलन था।
  • जलियांवाला बाग नरसंहार – 13 अप्रैल 1919। 13 अप्रैल 1919 को लोग अमृतसर के जलियांवाला बाग में सैफुद्दीन किचलू और सत्यपाल की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए इक्ट्ठा हुए थे।
  • 1 अगस्त 1920 को खिलाफत समिति ने तीन मुद्दों– पंजाब में हुई बेइंसाफी, खिलाफत का मुद्दा और स्वराज की मांग, पर असहयोग आंदोलन की शुरुआत की।
  • इसके बाद 1920 में असहयोग – आंदोलन की शुरुआत हुई।
  • अक्टूबर 1920 में एन.एम. जोशी, राय चौधरी ने बॉम्बे में अखिल भारतीय व्यापार संघ कांग्रेस की स्थापना की। अध्यक्षता लाला लाजपत राय ने की थी।
  • अकाली आंदोलन 1920 में शुरु हुआ था।
  • वर्ष 1925 में एसजीपीसी (शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटि) का गठन हुआ था।
  • सी.आर दास और मोतिलाल नेहरू ने कांग्रेस खिलाफत स्वराज पार्टी का गठन किया था। यह कांग्रेस में दूसरे विभाजन के नाम से भी जाना जाता है।
  • वर्ष 1927 में, श्रमिक और किसान पार्टी (डब्ल्यूपीपी) का गठन एस.एस. मिराजकर, के. एन. जुगलेकर और एस. वी. घाटे ने बॉम्बे में किया था।
  • वर्ष 1924 में, एच.आर.ए. (हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन) का कानपुर में गठन हुआ था। सी.एस आजाद, सचिन सान्याल और रामप्रसाद बिस्मिल इसके सदस्य थे।
  • वर्ष 1929 में, एचएसआरए ( हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन) का फिरोजशाह कोटला दिल्ली में गठन हुआ। भगत सिंह एचएसआरए में शामिल हुए।
  • 9 अगस्त 1925 को, काकोरी रेल डकैती हुई, इस षड़यंत्र में राम प्रसाद बिस्मिल, राजेन्द्र लाहिड़ी, रौशन लाल और अशफाकुल्लाह खान को फांसी की सजा दी गई।
  • 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को लाहौर षड़यंत्र मामले में फांसी की सजा दी गई।
  • 8 नवंबर 1927 को स्टेनली बाल्डविन के तहत ब्रिटिश कंजर्वेटिव सरकार  द्वारा साइमन कमिशन बनाया गया था।
    कमिशन का गठन 1919 के सुधार अधिनियम के बाद देश में सरकार की कार्य प्रणाली की जांच करने के लिए किया गया था।
  • नेहरू रिपोर्ट– 1928, राष्ट्र का दर्जा, सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार आदि के लिए।
  • जिन्ना का 14 सूत्री कार्यक्रम– 31 मार्च 1929
  • आईएनसी का 1929 में हुआ लाहौर अधिवेशन, अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की। इसमें पूर्ण स्वराज का संकल्प कांग्रेस द्वारा पारित किया गया और गांधी जी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन करने का फैसला किया गया।
  • 26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। 
  • दांडी मार्च के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरु किया गया था। 12 मार्च से  6 अप्रैल 1930 तक गांधी जी ने अपने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक की यात्रा की और  6 अप्रैल 1930 को नमक बनाकर नमक कानून को तोड़ा।
  • 12 नवंबर 1930 को पहला गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया था।
  • 5 मार्च 1931 को गांधी – इरविन समझौते पर हस्ताक्षर।
  • 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का ट्रायल।
  • 29 मार्च 1931, आईएनसी का कराची अधिवेशन, वल्लभ भाई पटेल ने अध्यक्षता की। इस अधिवेशन में पहली बार मौलिक अधिकारों और आर्थिक नीति का संकल्प पारित किया गया।
  • 7 सितंबर 1931 को दूसरा गोलमेज सम्मेलन हुआ जिसमें कांग्रेस की तरफ से गांधी जी ने हिस्सा लिया।
  • 16 अगस्त 1932 को सांप्रदायिक या रामसे मैकडोनाल्ड पुरस्कार की घोषणा हुई।
  • 26 सितंबर 1932, पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर किए गए।
  • नवंबर 1932 में तीसरा गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया था।
  • 1935 में, भारत सरकार अधिनियम को अखिल भारतीय संघ, प्रांतीय स्वायत्तता और केंद्र में  द्वैध शासन पद्धित होनी चाहिए, को बनाने के लिए पारित किया गया था।

भारत छोड़ो आंदोलन की ओर

महत्वपूर्ण कांग्रेस सत्रः

  1. 1936 – लखनउ (उ.प्र.)– अध्यक्षता – जे.एल.नेहरू
  2. 1937 – फैजपुर (महाराष्ट्र)– अध्यक्षता– जे.एल.नेहरू (गांव में आयोजित पहला अधिवेशन)
  3. 1938 –हरीपुरा (गुजरात)– एस.सी.बोस ने अध्यक्षता की
  4. 1939 –त्रिपुरी (एम.पी.)– एस.सी. बोस ने अध्यक्षता की
  • सितंबर 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ा और भारत की सहमति के बिना उसका सहयोगी घोषित कर दिया गया ।
  • 1939 में एस. सी. बोस ने फॉर्वाड ब्लॉक की स्थापना की। यह एक वाम पार्टी (left party) थी।
  • 10 अगस्त 1940– द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीयों के समर्थन पाने के लिए लॉर्ड लिनलिथगो वायसराय ने अगस्त प्रस्ताव की घोषणा की थी।
  • 11 मार्च 1942 को प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने भारतीयों के संवैधानिक गतिरोध और समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने के लिए सर स्टाफोर्ड क्रिप्स की अध्यक्षता में मिशन भेजने की घोषणा की।
  • क्रिप्स मिशन की असफलता के साथ 1942 में भारतीय नेताओं द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई और भारत छोड़ों का संकल्प गांधी जी ने तैयार किया। गांधी जी ने करो या मरो का नारा दिया था।
  • 1942 में कैप्टन मोहन सिंह और निरंजन गिल द्वारा सिंगापुर में इंडियन नेशनल आर्मी की स्थापना की गई। एस.सी. बोस ने सिंगापुर और रंगूनन के दूसरे मुख्यालय का पदभार संभाला।
  • 21 अक्टूबर 1943 को– एस.सी. बोस के अधीन सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार बनी। इसमें एक महिला रेजिमेंट भी थी जिसका नाम रानी झांसी रखा गया था।
  • 1945 में, द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ।
  • 1945 में, राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए लॉर्ड वावेल द्वारा वावेल योजना या शिमला सम्मेलन का प्रस्ताव किया गया था।
  • 1946 में, पीएम क्लिमेंट एट्टली द्वारा कैबिनेट मिशन प्लान की घोषणा।
  • 2 सितंबर 1946 को, जे.एल. नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ।
  • मार्च 1947 – लॉर्ड माउंटबेटन को सत्ता के हस्तांतरण के लिए रास्ता ढूंढ़ने के उद्देश्य के साथ भारत भेजा गया। इसे बालकन योजना के नाम से भी जाना जाता है।
  • 3 जून को इंडिपेंडेस ऑफ इंडिया एक्ट 1947 पारित किया गया जिसके द्वारा सत्ता को दो प्रभुत्व राष्ट्रों – भारत और पाकिस्तान, को सौंपा गया।

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